लो वतन फिर याद आया

लो वतन फिर याद आया

एक थे, हैं, और रहेंगे; हाँ वही, संवाद आया.
रक्त रंजित है तिरंगा, लो वतन फिर याद आया.
ओढ़ लो, और झूम लो, लहरा तिरंगा घूम लो.
लो जला लो सौ दिए, शहीदों को फिर चूम लो.
हम लड़ेंगे, न डरेंगे, हाँ वही, अपवाद आया.
रक्त रंजित है तिरंगा, लो वतन फिर याद आया.
वो शब्द उनके कुछ कड़े थे, तीर तरकश में पड़े थे.
वो उड़े, आ गड़े, स्तब्ध थे मानो खड़े.
रात गुज़री, लो सुबह थी, न कहीं कुछ ख़ास पाया.
रक्त रंजित है तिरंगा, लो वतन फिर याद आया.