... ये किसका है?

... ये किसका है?
डॉ. कृष्ण एन. शर्मा / Dr. Krishna N. Sharma

यूँ पन्नों पर बयाँ, स्याही का ये सामान किसका है?
वो 'पैग़म्बर' कहाँ हैं अब, और ये पैग़ाम किसका है?
वो हरदम कहते थे कि, सब ख़ुदा का है, ख़ुदा सब है.
जो 'पैग़म्बर' ख़ुदा के थे, तो ये 'शैतान' किसका है?

ये सारे लोग कहते हैं, खुदा का नाम ले ले कर,
की तू नापाक है, काफ़िर है, ये इलज़ाम है तुझपर,
मगर देखा नहीं उसको तो मेरा शक भी वाजिब है,
कि ये इलज़ाम है मुझपर तो , ये इलज़ाम किसका है?

शंख की गूँज में नफरत का जिंदाबाद ये कैसा?
मोहब्बत है लिखी मज़हब में, तो जेहाद ये कैसा?
मज़हबी आग भड़काकर के, रोटी सेंकने वालों,
अगर तुम पाक़ हो तो फिर, ये क़त्लेआम किसका है?
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